प्यारो प्राणी की प्यास बुझाना, सबसे बड़ा पुण्य कहलाता है। भीषण गर्मी में जहाँ इंसान ही नहीं बल्कि पशु-पक्षी भी जल के अभाव में अत्यंत कष्ट झेल रहे हैं, ऐसे समय में श्री मातृछाया जैन महिला संगठन, बेंगलूरु द्वारा जीवदया एवं सेवा का एक अत्यंत सराहनीय अभियान चलाया जा रहा है। संगठन ने आंध्रप्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में पशु-पक्षियों एवं अबोध जीवों के लिए लगभग 1800 से अधिक बड़ी जल कुंडियों का वितरण कर एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है।
यह सेवा कार्य ईस्ट एवं वेरट गोदावरी क्षेत्र के अंतर्गत कोव्बुर, काकीनाडा, राजमहेंद्रवरम (राजमुंदरी), विशाखापट्टनम, अमलापुरम, सामालकोटा, भीमवरम, पालकोल, तनुकु, निर्दोल आदि रथानों के साथ ही कई ऐसे जंगल एवं दुर्गम क्षेत्रों में भी बड़ी-बड़ी जल कुंडियाँ रखवाई गईं जहाँ सामान्यतः लोगों का पहुँचना कठिन होता है, वहाँ रहने वाले पशु-पक्षियों को भी इस भीषण गर्मी में जल मिल सके।
इस अभियान में श्री सुमतिनाथजी जीवदया ग्रुप, राजमंद्री के विशेष सहयोग एवं योगदान के लिए श्री मातृछाया जैन महिला संगठन ने आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर संगठन की मार्गदर्शिका त्रिशलाजी
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कोठारी ने कहा कि जहाँ दया का दीप जलता है, वहीं मानवता का सूरज निकलता है। जीवों की रक्षा, प्यासों को पानी यह है सच्ची सेवा, यही है धर्म की निशानी। निरंतर भारतभर में जीवदया एवं सेवा कार्यों में सक्रिय मातृछाया चाहे आंध्रप्रदेश हो, अहमदाबाद, राजरथान या बेंगलूरु, छोटे-छोटे करबों से लेकर दूरस्थ क्षेत्रों तक जल पात्र पहुँचाकर यह सिद्ध कर दिया है कि प्राणी मात्र की सेवा सच्चा धर्म है।
अध्यक्ष ललिताजी नागोरी ने बताया कि श्री मातृछाया जैन महिला संगठन केवल समाज सेवा तक सीमित नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों एवं अबोध जीवों की रक्षा एवं सेवा में भी निरंतर अग्रसर है। संगठन की यह पहल आज हजारों जीवों के लिए जीवनदायिनी सिद्ध हो रही है।
October 18, 2026
मातृछाया द्वारा 3000 से अधिक जल कुंडियों का वितरण


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