सेवा कार्य
सेवा, समर्पण और करुणा के साथ समाज एवं जीवमात्र के कल्याण का संकल्प।
जीवदया एवं प्राणी संरक्षण
जीवमात्र के प्रति करुणा, अहिंसा और संरक्षण की भावना मातृछाया की सेवा-यात्रा का मूल आधार है। संगठन पशु-पक्षियों के आहार-पानी की व्यवस्था, गौशालाओं के भरण-पोषण, पशु चिकित्सा तथा असहाय प्राणियों के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयासरत है। अनेक गौशालाओं को आर्थिक सहयोग, पशुओं के लिए शेड एवं पेयजल सुविधाओं का निर्माण और कत्लखानों में जाने वाली गायों को बचाकर सुरक्षित आश्रय तक पहुँचाने जैसे कार्यों के माध्यम से संगठन जीवदया के क्षेत्र में योगदान दे रहा है।
मानवसेवा एवं अनुकंपादान
मातृछाया जरूरतमंद, असहाय एवं आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्तियों और परिवारों की सहायता के लिए समर्पित है। संगठन राशन सामग्री, दैनिक आवश्यकताओं की वस्तुएँ, घर के किराए, चिकित्सा खर्च और अन्य जरूरी कार्यों में सहयोग प्रदान करता है। संकट की परिस्थितियों में पीड़ितों तक सहायता पहुँचाने के साथ-साथ संगठन लोगों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने, आत्मविश्वास बनाए रखने और कठिन परिस्थितियों से उबरने में सहयोग देने का प्रयास करता है।
स्वास्थ्य सेवा एवं चिकित्सा सहायता
स्वस्थ जीवन प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार है। मातृछाया निःशुल्क स्वास्थ्य जाँच, नेत्र परीक्षण एवं चिकित्सा शिविर, चश्मों का वितरण, आवश्यकतानुसार नेत्र शल्य चिकित्सा, कृत्रिम पैर प्रत्यारोपण और कैंसर जाँच जैसे जनकल्याणकारी कार्यक्रमों में सहयोग प्रदान करता है। किडनी रोगियों के डायलिसिस खर्च में आर्थिक सहायता तथा कोरोना महामारी के दौरान उपचार के लिए ऑक्सीजन मशीनों का दान संगठन की सेवा भावना को दर्शाता है।
शिक्षा सहायता एवं उज्ज्वल भविष्य
मातृछाया का प्रयास है कि आर्थिक कठिनाइयों के कारण किसी विद्यार्थी की शिक्षा बाधित न हो। संगठन जरूरतमंद विद्यार्थियों की स्कूल फीस भरने, पुस्तकें, स्कूल यूनिफॉर्म और आवश्यक शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराने में सहयोग करता है। विशेष जरूरतों वाले बच्चों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के लिए भी सुविधाओं के विकास में योगदान दिया जाता है। दृष्टिबाधित बच्चों के संगीत अभ्यास हेतु कक्ष का निर्माण इसी दिशा में एक उल्लेखनीय पहल है।
साधर्मिक भक्ति एवं समाज बंधुओं की सहायता
जैन धर्म में साधर्मिक भक्ति का विशेष महत्व है। मातृछाया जरूरतमंद जैन परिवारों को राशन, बच्चों की स्कूल फीस, अस्पताल के खर्च, दवाइयों, घर के किराए और अन्य आवश्यकताओं के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान करता है। संगठन जरूरतमंद समाज बंधुओं को रोजगार उपलब्ध कराने तथा स्वरोजगार के लिए सहायता देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का भी प्रयास करता है। साथ ही, ऐसे श्रद्धालुओं को जैन तीर्थयात्रा का अवसर प्रदान करने का प्रयास किया जाता है, जिन्होंने पहले कभी तीर्थदर्शन नहीं किए।
देवद्रव्य एवं धार्मिक सेवा
जिनशासन के प्रति श्रद्धा और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण की भावना मातृछाया की सेवा गतिविधियों का महत्वपूर्ण अंग है। संगठन देवद्रव्य के माध्यम से जिनालयों एवं तीर्थस्थलों के निर्माण, विकास और जीर्णोद्धार में सहयोग प्रदान करता है। सिद्धाचल स्थूलभद्र धाम, देवनहल्ली में देवली एवं चाँदी के सिंहासनों के निर्माण सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों के विकास में योगदान दिया गया है। इन प्रयासों का उद्देश्य धार्मिक धरोहरों का संरक्षण करना और भावी पीढ़ियों तक जैन धर्म के संस्कारों को पहुँचाने में सहयोग देना है।
गुरु भगवंतों की वैयावच्च एवं धार्मिक जागृति
जैन साधु-साध्वियों के प्रति विनय, श्रद्धा और सेवा का भाव जैन संस्कृति की महत्वपूर्ण विशेषता है। मातृछाया गुरु भगवंतों की वैयावच्च तथा आवश्यक सेवाओं में यथाशक्ति सहयोग प्रदान करता है। धार्मिक गतिविधियों और आध्यात्मिक आयोजनों के माध्यम से अहिंसा, संयम, सदाचार एवं करुणा जैसे मूल्यों को प्रोत्साहित किया जाता है। संगठन का प्रयास है कि जैन धर्म के संस्कार केवल परंपरा तक सीमित न रहें, बल्कि दैनिक जीवन में भी अपनाए जाएँ।
महिला सशक्तिकरण एवं ‘पहचान’
मातृछाया महिलाओं की प्रतिभा, रचनात्मकता और नेतृत्व क्षमता को प्रोत्साहित करने में विश्वास रखता है। संगठन की ‘पहचान’ पहल जैन समाज की महिलाओं को अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने, कौशल विकसित करने और समाज में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करने का मंच प्रदान करती है। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाना, सामाजिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी को प्रोत्साहित करना तथा उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की भावना को मजबूत करना है।
सामाजिक सेवा एवं सामुदायिक कल्याण
समाज का वास्तविक विकास तभी संभव है, जब प्रत्येक वर्ग को सहयोग, सम्मान और आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त हों। मातृछाया अनाथालयों, गौशालाओं, विशेष जरूरतों वाले व्यक्तियों के आश्रय स्थलों और अन्य सेवा संस्थानों की सहायता के माध्यम से वंचित एवं जरूरतमंद वर्गों तक पहुँचने का प्रयास करता है। संगठन सामूहिक सहभागिता, सामाजिक संवेदनशीलता और परस्पर सहयोग को प्रोत्साहित करते हुए समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने तथा परोपकार की संस्कृति को मजबूत बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
